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ओडिशा (भुवनेश्‍वर)

ब्यौरे विवरण
क्षेत्रफल 1,55,707 वर्ग कि.मी.
जनसंख्‍या 4,19,47,358 *
राजधानी भुवनेश्‍वर
मुख्‍य भाषा उड़िया


ओडिशा: एक दृष्टि

ओडिशा नाम संस्कृत के शब्द ओद्रा विषय या ओद्रा देसा से लिया गया है। ओद्रा देसा या ओर देसा का प्राचीन राज्य महानदी की घाटी और स्वर्ण रेखा नदी के निचले हिस्से तक ही सीमित था। इसके अंतर्गत वर्तमान के कटक और संबलपुर और मिदनापुर का एक हिस्सा शामिल था। यह पश्चिम में गोंडवाना, उत्तर में जंगली पहाड़ी राज्य जशपुर और सिंहभूम, पूर्व में समुद्र से और दक्षिण में गंजम से घिरा हुआ था।

किसी समय राजाओं और राज्यतंत्र की भ्रूमि रहा ओडिशा राज्य अब प्राकृतिक स्रोतों का समृद्ध गढ़ माना जाता है। यहां के लोग, मंदिरों का शिल्प, शास्त्रीय नृत्य, धर्म, मेले और पर्व-त्योहार, अदिवतीय हस्तकला और हस्तनिर्मित वस्तुएं, हरे-भरे जंगल, गुफाएं, खूबसूरत नीली पहाडियां हमेशा से पूरी दुनिया के इतिहासकारों, सैलानियों और पर्यटकों को आकषित करता रहा है। इसका समद्ध इतिहास, आंदोलनकारी स्वतंत्रता संग्राम, मंदिरों और स्मारकों की अभूतपर्व कला, संगीत, नृत्य, अनुष्टानों, शिकार द्वारा आदिवासी जीवन का वर्णन, जंगली तौर-तरीके महान इतिहासकारों और विद्वानों के लिए शोध का महत्वपूर्ण विषय बन चुका है।


शिक्षा

1 अप्रैल 1936 को एक अलग राज्य बनने के बाद ओडिशा पूर्वी भारत में शिक्षा का केंद्र बन गया। आजादी के बाद ओडिशा के शिक्षा तंत्र में कई सराहनीय परिवर्तन किए गए। परिवर्तनों के बाद ओडिशा में शिक्षा का स्तर काफी उच्च हो गया। साथ ही साथ सरकार ने भी ओडिशा में शिक्षा के स्तर को और आकर्षक बनाने के लिए कई पहल किए। ओडिशा के शैक्षणिक स्तर ने कई इंजीनियरिंग और व्यावसायिक संस्स्थानों को आधार प्रदान किया है। शिक्षा के आधारभूत सुविधाओं के कारण ओडिशा के अलग-अलग संकायों के विद्यार्थी विश्व स्तर पर सम्मान पा रहे हैं। हाल के वर्ष में ओडिशा में भारत के विभिन्न क्षेत्रों से विद्यार्थी उच्च ग्रहण करने के लिए आ रहे हैं। इससे कहा जा सकता है कि नब्बे के दशक के बाद शिक्षा के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव हुए। अब ओडिशा आम शिक्षा, तकनीकी शिक्षा, और व्यावसायिक शिक्षा के क्षेत्र में सर्वश्रेष्ठ‍ आधारभूत सुविधाएं प्रदान कर रहा है। कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के संस्थान उत्सुकतापूर्वक इसे अपने लक्ष्य के रूप में चुन रहे हैं क्योंकि यहां शिक्षा का भविष्य उज्जवल और खुशहाल है।


कृषि एवं सिंचाई

ओडिशा की अर्थव्यवस्था कृषि आधारित है, सकल घरेलू उत्पाद (एनएसडीपी)में इसकी भागीदारी 30 प्रतिशत है साथ ही इस क्षेत्र में 73 प्रतिशत लोग जुड़े हुए हैं। कृषि योग्य भूमि का कुल क्षेत्रफल 87.46 लाख हेक्टेयर, जिसमें 18.79 लाख हेक्टेयर क्षेत्र सिंचित है। ओडिशा का मौसम और मिट्टी यहां की कृषि अर्थव्यवस्था में मुख्य भूमिका निभाते हैं। कृषि योग्य भूमि का उपयोग अनाजों के उत्पादन में हो रहा है,जो राज्य की कुल भौगोलिक क्षेत्र का 40 प्रतिशत है और मुख्य रूप से तटीय क्षेत्रों जैसे बालासोर, भद्रक,कटक,गंजम,जाजपुर,जगतसिंहपुर,केंद्रपारा,खुर्दा,नयागढ़, पुरी आदि में उत्पादन किया जा रहा है।


संचार

वैश्वीकरण के युग में संचार एक ऐसा माध्यम है जिसके जरिए कुछ ही सेकेंडों में बड़ी से बड़ी परेशानी दूर हो जाती है। हाल के वर्षों में ओडिशा में संचार का विकास काफी तेज गति से हुआ है। यहां तक कि ओडिशा के दूर-दराज के गांव भी दूरसंचार, मोबाइल, पोस्टल आदि संचार माध्यमों से जुड़े हुए हैं। उद्योगीकरण में संचार का महत्वपूर्ण योगदान है और यही वजह है कि ओडिशा में संचार के विकास पर भी प्रमुखता से काम किया जा रहा है।


मेले और पर्व

साल के 12 महीनों में 13 त्योहर मनाने के कारण ही ओडिशा राज्य को देश के राज्यों की तुलना में अनोखा है। यहां मनाए जाने वाले त्योहार विज्ञान, अध्यात्म, इतिहास, पौराणिकता आदि के आधार पर मनाए जाते हैं। ओडिशा के मेले और पर्वों की सबसे बड़ी खासियत है अलग-अलग क्षेत्रों में इसकी विभिन्न्ता। इसका अर्थ यहां हर पर्व का अलग अंदाज में मनाया जाता है जो ओडिशा भाषियों की एकता को और भी मजबूती प्रदान करता है।

जगन्नाथ मंदिर में कई पर्व मनाए जाते हैं और कई मेले लगते हैं, जहां हर जाति, रंग और समुदाय के लोगों को शामिल होने का अवसर मिलता है। यह जगन्नाथ जी की महिमा ही है कि इसका प्रभाव न केवल ओडिशा में बल्कि पूरे भारतवर्ष में नजर आता है। इन त्योहारों और मेलों के जरिए ही ओडिशा के लोगों को एक-दूसरे से जुड़ने का मौका मिलता है, क्योंकि यहां लोग "वसुधैव कुटंबकम" पर विश्वास करते हैं।


आधारभूत संरचनाएं

किसी भी राज्य के विकास के लिए आर्थिक विकास बहुत मायने रखता है। लेकिन औद्योगिक विकास के लिए उचित एवं अनुकूल आधारभूत संचरनाओं का होना बहुत जरूरी है और राज्य सरकार इस पर काफी ध्यान दे रही है। इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने पिछले कुछ समय में निवेश आधारित आधारभूत संरचनाएं उपलब्ध कराने का प्रयास तेज कर दिया है। ओडिशा राज्य सरकार का प्रमुख एजेंडा राज्य को सड़क, रेल, समुद्र तथा वायु मार्ग के हिसाब से महत्वपूर्ण बनाना चाहती है।


उद्योग

ओडिशा भारत के महत्वपूर्ण राज्यों में से एक है, जो कई प्रकार के खनिज स्रोतों से पूरी तरह संपन्न है। उद्योगों के लिए ओडिशा के खनिज स्रोत उच्च स्तरीय हैं। ओडिशा में मुख्य रूप से लौह-अयस्क, मैगनीशियम, कोयला, बॉक्साइट, डोलोमाइट,टिन आदि खनिज पाए जाते हैं। ओडिशा के खनिज स्रोत इसे उद्योगों के लिए प्रमुख स्थानों में शामिल करता है। यही वजह है कि यहां राउरकेला स्टील प्लांट, राष्ट्रीय एलुमिनियम कंपनी, नेशनल थर्मल पावर कॉरपोरेशन की स्थापना की गई है, जो न केवल देश में बल्कि विश्वभर के बाजारों में अपनी अलग पहचान रखते हैं। इन सबके अलावा राज्य में उद्योग के आंतरिक ढांचे में काफी परिवर्तन किए गए हैं, जिसकी वजह से विश्व के कई बड़े औद्योगिक केंद्र ओडिशा की ओर एक बेहतर भविष्य की आशा से देख रहे हैं। पूर्वोत्तर भारत में ओडिशा सही मायनों में विकास कर रहा है और आने वाले सालों में यह एक मुख्य औद्योगिक केंद्र के रूप में उभर सकता है।

ओडिशा सरकार का लक्ष्य उद्योग तैयार करना, निवेशकों को सहायक माहौल देना है, जिससे कि राज्य में उद्योगों का विकास हो, लोगों को रोजगार मिल सके और आर्थिक स्थिति में सुधार हो। आईपीआर-2001 और ओडिशा उद्योग(सरलीकरण) एक्ट 2004 सरकार के ऊपर वर्णित लक्ष्यों को साकार करता है। वैसे भी ओडिशा एक मुख्य निवेश केंद्र के रूप में उदित हो चुका है, न केवल राष्ट्रीय बल्‍कि अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के लिए भी। खासतौर से स्टील, एलुमिलियम, पेट्रो-कैमिकल, पावर, आईटी और आईटीईएस, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग, पर्यटन के अलावा कई और क्षेत्र प्रमुख हैं।


खनिज

देश की खनिज संपदा में ओडिशा का महत्वर्पूण योगदान है।इसके अंतर्गत खनिजों की बड़ी किस्में शामिल हैं, जिनमें लौह-अयस्क, क्रोमाइट, मैगनीशियम-अयस्क,बॉक्साइट, गैर कोकिंग कोयला,लाइमस्टोन, डोलोमाइट, निकेल-अयस्क, वनाडियम-अयस्क, तांबा-अयस्क, सीसा-अयस्क,फायरक्ले, चीनी मिट्टी, ग्रेफाइट, क्वार्ट्ज, लिमोनाइट, सिलिमेनाइट, जिरकॉन और टिन-अयस्क।


पर्यटक स्थल

देश का पूर्वी तट जो बंगाल की खाड़ी से लगा हुआ है, उसका एक बड़ा भूभाग ओडिशा की सीमा को घेरे हुए हैं। यह राज्य सांस्कृति, नैसर्गिक एवं समृद्ध इतिहास अपने में समेटे हुए है। यहां के समुद्री किनारे, झीलें, शानदार वन, वन्यजीव, अद्वितीय हस्तकौशल, यादगार स्मारक, अपनी संस्कृति से जुड़े वनवासी, रंगभरे उत्सव, संगीत तथा नृत्य आज भी अपनी आभा बिखेर रहे हैं। यहां के कई स्थल ऐसे हैं, जो आज भी वर्णित नहीं किए गए हैं।

सामान्यतः ओडिशा को भगवान जगन्नाथ की भूमि के नाम से भी जाना जाता है। यहां पर्यटन की असीम संभावनाएं हैं और राज्य इनका दोहन भी कर रहा है। नीलमाधब की कहानी को कंटीलो के साथ जोड़ना काफी उत्तेजनापूर्ण है। ऊषाकोठी के हरे वन एवं सिमिलिपाल के जंगलों में पक्षियों की चहचहाहट इस क्षेत्र की ओर लोगों को आकर्षित करते हैं। भुवनेश्वर से बीस किलोमीटर की दूरी पर बने नंदनकानन के वन हर उम्र के लोगों को अपनी ओर खींचते हैं। शेर सफारी एवं बाघ सफारी यहां के मुख्य आकर्षणों में से एक हैं।

वन्यजीवन को पसंद करने वालों के लिए महानदी का टिकरपड़ा मगरमच्छ अभयारण्य अपनी ओर खींचता है। वर्ष में दो बार ओलिव रिडले कछुए गहिरमाथा में आकर अंडे देते हैं तथा उनसे बच्चे निकलने के बाद यहां से चले जाते हैं।


ओडिशा पर्यटनः एक दृष्टि में

सामान्यतः ओडिशा को भगवान जगन्नाथ की भूमि के नाम से भी जाना जाता है। यहां पर्यटन की असीम संभावनाएं हैं और राज्य इनका दोहन भी कर रहा है। नीलमाधब की कहानी को कंटीलो के साथ जोड़ना काफी उत्तेजनापूर्ण है। ऊषाकोठी के हरे वन एवं सिमिलिपाल के जंगलों में पक्षियों की चहचहाहट इस क्षेत्र की ओर लोगों को आकर्षित करते हैं। भुवनेश्वर से बीस किलोमीटर की दूरी पर बने नंदनकानन के वन हर उम्र के लोगों को अपनी ओर खींचते हैं। शेर सफारी एवं बाघ सफारी यहां के मुख्य आकर्षणों में से एक हैं।

वन्यजीवन को पसंद करने वालों के लिए महानदी का टिकरपड़ा मगरमच्छ अभयारण्य अपनी ओर खींचता है। वर्ष में दो बार ओलिव रिडले कछुए गहिरमाथा में आकर अंडे देते हैं तथा उनसे बच्चे निकलने के बाद यहां से चले जाते हैं।

ओडिशा की चिलका झील एशिया की सबसे बड़ी खारे पानी की झील है। यहां आप अनगिनत प्रवासी पक्षियों को आसानी से देख सकते हैं। हनीमून टापू और नाश्ता टापू जैसे प्रसिद्ध टापू इसी झील की शोभा बढ़ा रहे हैं। डॉल्फिन मछलियों की अटखेलियां इस झील की खूबसूरती में चार चांद लगाते हैं।

यहां के तेज प्रवाह वाले बारहमासी झरने बागरा, दुदुमा, हरिशंकर, नृसिंहनाथ, प्रधानपाट, खंडाधार, बरेहीपानी और जोरंदा यहां के आकर्षण को और भी बढ़ा देते हैं। इनसे बनने वाले मनोरम दृश्य को देखने के लिए पर्यटक काफी दूर-दूर से आते हैं। ग्रीष्मकाल में यहां आने वाले पर्यटक झरनों को देखकर अपनी सारी थकावट को भूल जाते हैं।

इतना ही नहीं ठंड के मौसम में यहां के गर्म पानी के अटरी, तप्तपानी, दुलाझरी और तारबालो झरने लोगों को अपनी ओर खींचते हैं। ओडिशा के समुद्री तटों की लंबाई लगभग 400 किमी है, जो चंदनेश्वर से गोपालपुर तक फैला हुआ है तथा इसे विश्व का सबसे बडा समुद्री किनारा होने का सम्मान हासिल है। बालासोर जिले का चांदीपुर समुद्री तट भी अपनी एक विशिष्ठ पहचान रखता है।

पर्यटन स्थलों के साथ ही ओडिशा अपने विभिन्न कलात्मक एवं सांस्कृतिक विरासतों, मेले तथा उत्सवों के लिए भी प्रसिद्ध है। इन उत्सवों में पुरी की रथयात्रा तो पूरे विश्व में विख्यात है। बरगढ़ की धनु यात्रा, संबलपुर की सीतला षष्ठी, चंदनेश्वर का नीला पर्व और बारीपदा का छोउ नृत्य भी यहां की प्रसिद्धि में बराबर का योगदान देते हैं।


पश्चिमी ओडिशा में पर्यटन

ओडिशा सरकार ने ओडिशा पर्यटन विकास निगम के साथ मिलकर यह निर्णय लिया है कि वे राज्य का विकास न केवल तटीय क्षेत्रों में बल्कि पश्चिमी प्रदेशों में एक समान रूप में करेंगे।

ओडिशा के पश्चिमी क्षेत्र के पर्यटक स्थल
जिले पर्यटक स्थल
बोलनगिर बोलनगिर, हरिशंकर, पटनागढ़, रानीपुर, झारियल, जोगीशारदा , तुरकेला और संताला
बारगढ़ बारगढ़ एवं नरसिंहनाथ
देवगढ़ प्रधानपट (देवगढ़ शहर के बाहरी क्षेत्र में )
झारसुगुडा झारसुगुडा,विरामखोल ,ब्रजराजनगर
कालाहांडी भवानीपटना, अमपानी, फुरली -झारन, कार्लापट,असुरगढ़ , बेलखांडी, गुदाहांडी, जूनागढ़ और थुआमुल रामपुर
नुआपाड़ा नुआपाड़ा, बुद्धिखोमना, योगीमाथा और पातालगंगा
संबलपुर संबलपुर, हीराकुड, हुमा, चिपलिमा, ऊषाकोठी और गुदगुदा
सोनेपुर सोनेपुर, बिंका का चाराडा (पापाक्स-हायाघाट)
सुंदरगढ़ सुंदरगढ़, राउरकेला, जूनागढ़, वेदव्यास, ऊषाकोठी, मंदिरा, कंदाधारा, देवधर, घोझर, दारजींग , मिरीग्लोथ और छतरी हिल

* आईटी विभाग, ओडिशा सरकार

राज्य एवं राजधानी

* एस (ग्रीष्म ऋतु) और * डब्ल्यू (शीत ऋतु)