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लक्षद्वीप (कवारत्ती)

ब्यौरे विवरण
क्षेत्रफल 32 वर्ग किलोमीटर
जनसंख्‍या 64,429 *
राजधानी कवारत्ती
मुख्‍य भाषा मलयालम, जेसरी (द्वीप भाषा) और माहल


इतिहास और भूगोल

इन द्वीपों के बारे में, इनके पूर्व इतिहास के बारे में अधिक जानकारी उपलब्‍ध नहीं है। समझा जाता है कि पहले-पहल लोग आकर अमीनी, अनद्रौत, कावारत्‍ती और अगात्‍ती द्वीपों पर बसे। पहले यह विश्‍वास किया जाता था कि द्वीप में आकर बसने वाले मूल लोग हिंदू थे और लगभग 14वीं शताब्‍दी में किसी समय अरब व्‍यापारियों के प्रभाव में आकर मुसलमान बन गए। परंतु हाल में पुरातत्‍वीय खोजों से पता चलता है कि लगभग छठी या सातवीं शताब्‍दी के आसपास यहां बौद्ध रहते थे। सर्वप्रथाम इस्‍लाम धर्म को अपनाने वाले जिन लोगों और निवासियों का पता चलता है वे हिजरी वर्ष 139 (आठवीं शताब्‍दी) के समय के मालूम होते हैं। इस तारीख का पता अगात्‍ती में हाल में खोजे गए मकबरों के पत्‍थरों पर खुदी तारीखों से लगता है। स्‍थानीय परंपरागत मान्‍यताओं क अनुसार, इस द्वीप में अरब सूफी उबैदुल्‍ला हिजरी सन 41 में इस्‍लाम को लेकर आए।

शायद 16वीं शताब्‍दी तक स्‍वतंत्र इन द्वीपों में बसने वाले लोगों को पुर्तगालियों के उपनिवेशों के आधिपत्‍य से मुक्ति पाने के लिए चिरक्‍कल के राजा की सहायता लेनी पड़ी। इससे वह यहां अपना प्रभुत्‍व जमा सका और बाद में इन द्वीपों को कन्‍नानूर में मोपला समुदाय के प्रमुख अली राजा को जागीर के रूप में सौंप दिया जो बाद में स्‍वतंत्र शासक बन बैठा। अरक्‍कल शासन लोकप्रिय नहीं हुआ और 1787 में टीपू सुल्‍तान ने इन द्वीपों पर कब्‍जा करने की उत्‍तर के द्वीपवासियों की याचिका को स्‍वीकार कर लिया। टीपू सुल्‍तान के पतन के बाद ये द्वीप ईस्‍ट इंडिया कंपनी के अधिकार में दे दिए गए, परंतु इन पर कन्‍नानूर के शासक वस्‍तुत: तब तक शासन करते रहे जब तक कि अंतत: बीसवीं शताब्‍दी के आरंभ में अंग्रेजों ने इन पर कब्‍जा नहीं कर लिया। 1956 में इन द्वीपों को मिलाकर केंद्रशासित प्रदेश बना दिया गया और तब से इसका शासन केंद्र सरकार के प्रशासक के माध्‍यम से चल रहा है। सन 1973 में लक्‍का दीव, मि‍नीकाय और अमीनदीवी द्वीपसमूहों का नाम लक्षद्वीप कर दिया गया। लक्षद्वीप प्रवाल द्वीपों का एक समूह है जिसमें 12 प्रवाल द्वीप, वीन प्रवाल भित्ति और जलमग्‍न बालू के तट शामिल हैं। यहां के कुल 27 द्वीपों में से केवल 11 में आबादी है। ये द्वीप उत्‍तर में 8 अंश और 12.3 अक्षांश पर तथा पूर्व में 71 अंश और 74 अंश देशांतर पर केरल तट से लगभग 280 से 480 कि.मी. दूर अरब सागर में फैले हुए हैं।


कृषि

कृषि यहां की प्रमुख फसल नारियल है और प्रतिवर्ष 580 लाख नारियल का उत्‍पादन होता है। 2,598 हेक्‍टेयर भूमि में यहां खेती की जाती है। यहां के नारियल को जैव उत्‍पाद (आर्गेनिक प्रोडक्‍ट) के रूप में जाना गया है। भारत में सर्वाधिक नारियल उत्‍पादन लक्षद्वीप में होता है तथा प्रति हेक्‍टेयर उपज 22,310 नारियल है और प्रत्‍येक पेड़ से प्रतिवर्ष औसतन 97 नग उत्‍पादन होता है। लक्षद्वीप के नारियलों में विश्‍व के अन्‍य नारियलों के मुकाबले सर्वाधिक तेल (72 प्रतिशत) पाया जाता है।

मछली पालन

मछली पालन मछली पकड़ना यहां का एक अन्‍य प्रमुख कार्य है। इसके चारों ओर के समुद्र में मछलियां बहुत अधिक हैं। लक्षद्वीप में प्रति व्‍यक्ति मछली की उपलब्‍धता देश में सर्वाधिक है।


उद्योग

उद्योग नारियल के रेशे और उससे बनने वाली वस्‍तुओं का उत्‍पादन यहां का मुख्‍य उद्योग है। सरकारी क्षेत्र के अधीन नारियल के रेशों की सात फैक्ट्रियां, सात रेशा उत्‍पादन एवं प्रदर्शन केंद्र और चार रेशा बंटने वाली इकाइयां हैं। इन इकाइयों में नारियल रेशों और सुतली के उत्‍पादन के अतिरिक्‍त नारियल के रेशे से बनी रस्सियां, कॉरीडोर मैट, चटाइयों और दरियों आदि का भी उत्‍पादन किया जाता है। विभिन्‍न द्वीपों में निजी क्षेत्र की कई नारियल रेशा इकाइयां काम कर रही हैं।


परिवहन

इस समय मुख्‍य द्विपीय क्षेत्र में एम वी कावारत्‍ती, एमवी टीपू सुल्‍तान, एमवी भारत सीमा, एमवी मिनिकॉय, एम वी अमनदिवी तथा एमवी दीपसेतु संचालित हैं। अन्‍य अंतरद्विपीय फेरियां-खदीजा बीवी, हमी बीवी, वींरजिली, ब्‍लू मार्लिन, ब्‍लैक मार्लिन तथा स्किपजैक मिनिकॉय और कावारत्‍ती के अतिरिक्‍त परिवहन सुविधा उपलब्‍ध कराते हैं। चार कार्गो बैराज-उबैदुल्‍ला, थिनाकारा, लाकादिव तथा चेरियम कार्गो सुविधा उपलब्‍ध उपलब्‍ध कराते हैं। कावारत्‍ती मे अंतरदीपीय फेरी को बंकर उपलब्‍ध कराने क लिए एक तेल बैराज-सुखेली (60 एमटी) है। द्वीपों से कावारत्‍ती तथा मुख्‍य भूमि तक गंभीर रोगियों को पहुचाने के लिए प्रशासन दो वायुयान चलाता है। दूसरे वायुयान का प्रयोग कानून व्‍यवस्‍था बनाए रखने तथा मानसून के दौरान कनेक्टिविटी बनाए रखने के लिए किया जाता है। इंडियन एयरलाइंस तथा किंगफिशर एयरलाइंस के चाबियों के लिए तथा कावारत्‍ती और अगाती/बांगरम को जोड़ने के लिए भी वायुयान सेवा उपलब्‍ध है।

नई योजना के तहत प्रस्‍तावित 18 जहाजों में से 150 यात्री क्षमता वाले जहाज तथा 10 टन बुर्ल्‍ड टग वाले तीन जहाज खरीदे जा चुके हैं तथा संचालित किए जा रहे हैं। पीएमजीएसवाई के तहत 15 यात्री क्षमता वाले एक तथा 50 यात्री क्षमता वाले तीन जहाज खरीदे गए हैं। कोलंबों डाकयार्ड, श्रीलंका में 10 मीट्रिक टन कार्गो तथा 250 यात्री क्षमता वाले दो जहाजों का निर्माण किया जा रहा है। पहला जहाज दिसंबर, 2010 में तथा दूसरा जून, 2010 में मिल जाएगा। विपुल बंदरगाह, गोवा में 200 यात्री क्षमता वाले छह लैंडिंग बारजेज भी बनाए जा रहे हैं। इनके अतिरिक्‍त समिति ने दो लैंडिंग बारजेज, एक आयल बारजेज तथा एक एलपीजी जहाज की संस्‍तुति भी की है। मंत्रालय ने 400 यात्री क्षमता वाले एक यात्री जहाज की खरीद के लिए ईएफसी मंजूरी के लिए प्रस्‍ताव दिया है।


पर्यटन केंद्र

एक महत्‍वपूर्ण उद्योग के रूप में पर्यटन का विकास हो रहा है। अगाती, बंगारम, कलपेनी, कादमत, कावारत्‍ती तथा मिनीकॉय आदि मुख्‍य पर्यटन स्‍थल हैं।



* 2011 की जनगणना के आधार पर (अनंतिम डाटा)

स्रोत: इंडिया बुक 2012 - एक संदर्भ वार्षिक

राज्य एवं राजधानी

* एस (ग्रीष्म ऋतु) और * डब्ल्यू (शीत ऋतु)