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दादरा और नगर हवेली (सिलवास)

ब्यौरे विवरण
क्षेत्रफल 491 वर्ग किलोमीटर
जनसंख्‍या 3,42,853 *
राजधानी सिलवास
मुख्‍य भाषा गुजराती तथा हिंदी


इतिहास और भूगोल

मराठों और पुर्तगालियों के बीच लंबे संघर्ष के बाद 17 दिसंबर, 1779 को मराठा सरकार ने मित्रता सुनिशचित करने खातिर इस प्रदेश के कुछ गावों को 12,000 रुपए का राजस्व क्षतिपूर्ति के तौर पर पुर्तगालियों को सौंप दिया| जनता द्वारा 2 अगस्त,1954 को मुक्त कराने तक पुर्तगालियों ने इस प्रदेश पर शासन किया| 1954 से 1961 तक यह प्रदेश लगभग स्वतंत्र रूप से काम करता रहा जिसे 'स्वतंत्र दादरा एंव नगर हवेली प्रशासन'ने चलाया| लेकिन 11 अगस्त, 1961 को यह प्रदेश भारतीय संघ में शामिल हो गया और तब से भारत सरकार एक केंद्रशासित प्रदेश के रूप में इसका प्रशासन कर रही है| पुर्तगाल के चंगुल से इस क्षेत्र की मुक्ति के बाद से 'वरिष्ठ पंचायत' प्रशासन की परामर्शदात्री संस्था के रूप में कार्य कर रही थी परंतु इसे 1989 में भंग कर दिया गया और अखिल भारतीय स्तर पर संविधान संशोधन के अनुरूप दादरा और नगर हवेली जिला पंचायत और 11 ग्राम पंचायतों की एक प्रदेश परिषद गठित कर दी गई| दादरा और नगर हवेली 491 वर्ग कि.मी. में फैला हुआ छोटा-सा केंद्रशासित प्रदेश है| यह गुजरात और महाराष्ट्र जैसे राज्यों से घिरा हुआ है| इसके दो भाग हैं: एक दादरा और दूसरा नगरहवेली| निकटतम रेलवेस्टेशन वापी में है, जो सिलवासा से 18 किलोमीटर दूर है|


कृषि

दादरा और नगरहवेली मुख्यतःग्रामीण क्षेत्र है, जहां 79 प्रतिशत आदिवासी रहते हैं| इसका कृषि क्षेत्र लगभग 21,115 हेक्टेयर है| मुख्य फसल धान (खरीफ) है तथा नागली और पहाड़ी बाजार अन्य प्रमुख फसलें हैं| फलों में आम, चीकू तथा केले का मुख्य उत्पादन होता है तथा कुल भू-भाग के 40 प्रतिशत क्षेत्र में वन हैं|

पिछले कुछ वर्षों से गन्ने की खेती में वृद्धि हुई है| सिंचित क्षेत्रों में बहु-फसल पद्दति के उपाय किए जा रहे हैं| दुधानी तथा मंडोनी में शीघ्र ही ऑर्गेनिक फार्मिंग खेती शुरू की जाएगी| अभी तक 60 किसान क्रेडिट कार्ड जारी किए गए हैं|


उद्योग

1956-66 से पहले इस प्रदेश में कोई उद्योग नही था| केवल कुछ दस्तकार परंपरागत रूप से बर्तन, चप्पल, जूते जैसे चमड़े का कुछ सामान और बांस की चीजें बनाते थे| 1967-68 में दान उद्योग सहकारी संघ लि. ने सहकारी क्षेत्र में औद्योगिक संपदा की स्थापना करके छोटे पैमाने पर औद्योगिक विकास के काम की शुरुआत की| इसके बाद सिलवासा,मसात और खदोली में तीन सरकारी औद्योगिक संपदाएं विकसित की गईं| 2006-07 में 1863 लघु उद्योग, 430 मझौली/लघु उद्योग इकाइयां कार्यरत थीं, जिनमें 46,000 लोग काम कर रहे थे|


सिंचाई और बिजली

इस क्षेत्र में स्वतंत्रता से पूर्व, यहां किसी प्रकार की सिंचाई सुविधाएं नही थीं और किसानों को पूरी तरह वर्षा पर निर्भर रहना पड़ता था| प्रदेश के भारतीय संघ में सम्मिलित होने के बाद लघु सिंचाई क्षेत्र में पर्याप्त उपाय किए गए हैं| अब तक सिंचाई कुओं से संबंधित 128 लिफ्ट सिंचाई परियोजाएं पूरी की जा चुकीं हैं| भूतल जल संसाधनों, जैसे की नदियों,बांधो के जरिए प्रदेश में 1851 हेक्टेयर क्षेत्र के लिए अतिरिक्त सिंचाई व्यवस्था की गई है| मंझोली सिंचाई परियोजना-जैसे कि दमनगंगा आरक्षित जल परियोजना के जरिए इस केंद्रशासित प्रदेश में 115 कि.मी.छोटी नहरें और राजबहे चल रहे हैं| 4,300 हेक्टेयर में सभी तरह के फिल्ड चैनलों में विकास कार्य पूरा हो चुका है तथा 4,049 हेक्टेयर में परीक्षण किया गया है|

इस क्षेत्र की स्वतंत्रता से पूर्व गावों में बिजली नही थी| इस क्षेत्र में केवल एक डीजल जनरेटर सेट था जोकि सिलवासा कस्बे के अत्यंत महत्वपूर्ण व्यक्तियों के लिए बने सर्किट हाउस में बिजली उपलब्ध कराने के लिए था|

स्वतंत्रता के बाद केंद्रशासित प्रदेश के प्रशासन ने पड़ोसी राज्य गुजरात के सहयोग से ग्रामीण विद्युतीकरण का काम हाथ में लिया और 1976 तक 25 गांवों के विद्युतीकरण का काम पूरा कर लिया| केंद्रशासित प्रदेश की बिजली की मांग गुजरात बिजली बोर्ड वापी सिलवासा से केवल एक सर्किट के जरिए पूरी कर रहा है और सीमित संख्या में उपभोक्ताओं को बिजली उपलब्ध होती है| 1979 में पहला 66 के.वी. सब-स्टेशन आमली में स्थापित किया गया| इस सब-स्टेशन के चालू होने पर बिजली विभाग सभी गांवों को बिजली उपलब्ध कराने की स्थिति में आ होगा|

खदोली गांव में 220/66 किलोवाट, 2*160 एमवीए सब-स्टेशन को विद्युत मंत्रालय की मंजूरी मिल चुकी है| पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन ने काम शुरू कर दिया है तथा इसके तीन वर्षों में पूरा हो जाने की संभावना है| इसके अतिरिक्त बागधारा, अरुल, पिपराई, साईली, वेलुग्राम में 66/11 किलोवाट सब-स्टेशन की स्थापना पर विचार चल रहा है|

इस क्षेत्र की बिजली की मांग देश के पशचिमी क्षेत्र के केंद्रीय बिजली उत्पादन केन्द्रों से पूरी की जाति है| केंद्र से इस समय 270 मेगावाट बिजली प्राप्त होती है| भारत सरकार द्वारा इस केंद्रशासित प्रदेश को दिए जाने वाले टैक्स होलीडे (कर छूट) लाभ के विस्तार के कारण तेजी से हो रहे औद्योगीकरण की वजह से प्रदेश में बिजली की जबर्दस्त मांग बढ़ी है|


परिवहन

केंद्रशासित प्रदेश पूरी तरह महाराष्ट्र और गुजरात के सड़क नेटवर्क पर निर्भर है क्योंकि मुंबई से इन दोनों राज्यों को पार करने के उपरांत ही प्रदेश में पंहुचा जा सकता है| वर्तमान में सड़कों की कुल लंबाई 635 कि.मी.है जिसमें से 570 कि.मी. पक्की हैं| लगभग सभी गांव ऐसी सड़कों से जुड़ें हैं जो हर मौसम में ठीक रहती हैं| मुंबई से अहमदाबाद का रेलमार्ग वापी से भी जुड़ा है| निकटतम हवाई अड्डा मुंबई में है| बढ़ते यातायात कि जरूरतों के मद्देनजर प्रदेश में सड़कें चौड़ी करने का काम हाल में शुरू किया गया है|

तेजी से बढ़ रहे उद्योगीकरण को देखते हुए सिलवासा और आस-पास के क्षेत्रों में अन्य छुट-पुट कार्यों के अलावा चार लेन सड़क-निर्माण का कार्य शुरू किया गया है| दादरा-तिगहरा दो लेन सड़क को चार लेन में बदलने का काम प्रगति पर है| 17.69 कि.मी. की दो लेन वाली सड़कों को चार लेन का बनाने का कार्य पूरा हो गया है| सिलवासा-करोली के बीच 5.7 कि.मी. रोड़ को भी चार लेन बनाया जा रहा है|


त्‍योहार

इस क्षेत्र में सामान्यतया सभी हिंदू, मुस्लिम और ईसाई त्योहार मनाए जाते हैं| आदिवासी अपने ही त्योहार मनाते हैं| ढोडिया और वर्ली जनजातियां 'दिवसो' त्योहार मनाती हैं ढोडिया जनजाति रक्षाबंधन भी मनाती है| वर्ली, कोकना और कोली जनजातियां भावडा त्योहार मनाती हैं| यहां कि सभी जातियों के लोग फसल काटने से पहले ग्राम देवी की पूजा करते हैं तथा फसल काटने के बाद 'काली पूजा' का त्योहार मनाते हैं|


पर्यटन स्‍थल

घने व क्षेत्र तथा अनुकूल जलवायु को देखते हुए यहां पर्यटन क्षेत्र को उच्च प्राथमिकता दी गई है|

पर्यटन कि दृष्टि से प्रमुख स्थान हैं-ताड़केश्वर शिव मंदिर, वृंदावन, खानवेल का हिरण पार्क, वाणगंगा झील और द्वीप उद्यान, दादरा; वनविहार उद्यान, लघु प्राणी विहार, बाल उद्यान, आदिवासी म्यूजियम और सिलवासा स्थित हिरवावन उद्यान/धुधानी में जलक्रीड़ा स्थल का काम पूरा हो चुका है|

सिलवासा के यात्री निवास से सटे खुले रंगमंच के निर्माण का काम प्रगति पर है| पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए हर साल तारपा उत्सव, पतंग उत्सव और विश्व पर्यटन दिवस आदि आयोजित किए जाते हैं|


* 2011 की जनगणना के आधार पर (अनंतिम डाटा)

स्रोत: इंडिया बुक 2012 - एक संदर्भ वार्षिक

राज्य एवं राजधानी

* एस (ग्रीष्म ऋतु) और * डब्ल्यू (शीत ऋतु)