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राजभाषा

राजभाषा - संवैधानिक/वैधानिक प्रावधान
संविधान की धारा 343(1) के अनुसार देवनागरी लिपि में हिन्‍दी संघ की राजभाषा होगी। धारा 343(2) में अंग्रेजी को आधिकारिक कार्य में उपयोग संविधान आंरभ होने की तिथि के 15 वर्ष (अर्थात 25 जनवरी 1965) की अवधि तक जारी रखने के लिए कहा गया है। धारा 343(3) में संसद को 25 जनवरी 1965 के बाद भी आधिकारिक प्रयोजनों के लिए अंग्रेजी के उपयोग को जारी करने के‍ लिए कानून बनाने का अधिकार दिया गया है। तदनुसार राजभाषा अधिनियम, 1963 (संशोधित 1967) की धारा 3(2) के अनुसार 25 जनवरी 1965 के बाद भी आधिकारिक कार्य में अंग्रेजी के उपयोग को जारी रखने के बात कही गई है। इस अधिनियम में यह भी बताया गया है कि हिन्‍दी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं का उपयोग कुछ विशिष्‍ट प्रयोजनों के लिए अनिवार्य रूप से किया जाएगा जैसे कि प्रस्‍ताव, सामान्‍य आदेश, नियम, अधिसूचना, प्रशासनिक तथा अन्‍य रिपोर्ट, प्रेस सम्‍प्रेषण, प्रशासनिक और अन्‍य रिपोर्ट तथा संसद के सदनों या सदन में रखे जाने वाले आधिकारिक पत्र; संविदाएं, करार, लाइसेंस, अनुज्ञा पत्र, निविदा सूचनाएं और निविदा के प्रपत्र आदि।

1976 में राजभाषा अधिनियम, 1963 की धारा 8(1) के प्रावधानों के तहत राजभाषा के नियम बनाए गए थे। इसकी प्रमुख विशेषताएं निम्‍नानुसार हैं:


  • ये आयुक्‍त, समिति या ट्रिब्‍यूनल के किसी कार्यालय सहित सभी केन्‍द्रीय सरकार के कार्यालयों पर लागू होंगे, जिनकी नियुक्ति केन्द्रीय सरकार द्वारा की गई है और निगम या इसके द्वारा स्‍वामित्‍व वाली अथवा नियंत्रित कंपनियां;
  • केन्‍द्रीय सरकार के कार्यालय से राज्‍य / संघ राज्‍य क्षेत्र या ''क'' क्षेत्र में रहने वाले किसी व्‍यक्ति को भेजा गया संप्रेषण हिन्‍दी में होगा, जो हैं उत्तर प्रदेश, उत्तराखण्‍ड, हिमाचल प्रदेश, मध्‍य प्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार, झारखण्‍ड, राजस्‍थान, हरियाणा और अंडमान तथा निकोबार द्वीप समूह एवं दिल्‍ली;
  • केन्‍द्रीय सरकार के कार्यालय से राज्‍य / संघ राज्‍य क्षेत्र या ''ख'' क्षेत्र में रहने वाले किसी व्‍यक्ति को भेजा गया संप्रेषण हिन्‍दी में होगा, जो हैं पंजाब, गुजरात, महाराष्‍ट्र और चंडीगढ़ संघ राज्‍य क्षेत्र। यद्यपि क्षेत्र ''ख'' में रहने वाले किसी व्‍यक्ति को भेजा गया संप्रेषण अंग्रेजी या हिन्‍दी में हो सकता है।
  • केन्‍द्रीय सरकार के कार्यालय से ''ग'' क्षेत्र में राज्‍य सरकार के कार्यालय, जिसमें वे अन्‍य सभी राज्‍य और संघ राज्‍य क्षेत्र शामिल हैं या किसी कार्यालय (जो केन्‍द्रीय सरकार का कार्यालय नहीं है) या व्‍यक्ति को भेजा गया संप्रेषण अंग्रेजी में होगा जिन्‍हें क्षेत्र ''क'' और ''ख'' में नहीं लिया गया है।
  • केन्‍द्रीय सरकार के कार्यालयों के बीच और केन्‍द्रीय सरकार के कार्यालयों से राज्‍य सरकारों / संघ राज्‍य क्षेत्र की सरकारों के कार्यालयों एवं व्‍यक्तियों के बीच सम्‍प्रेषण इस अनुपात में हिन्‍दी में होगा, जैसा समय समय पर निर्धारित किया जाता है।
  • केन्‍द्रीय सरकार के कार्यालय से संबंधित सभी हस्‍तपुस्तिकाएं, संहिताएं और अन्‍य प्रक्रियागत साहित्‍य हिन्‍दी और अंग्रेजी दोनों में तैयार किया जाएगा। सभी प्रपत्र, पंजिकाओं के शीर्षक, नाम पट्टिकाएं, सूचना पटल और स्‍टेशनरी आदि के विभिन्‍न मद भी हिन्‍दी और अंग्रेजी दोनों में तैयार किए जाएंगे।
  • यह अधिनियम की धारा 3(3) में निर्दिष्‍ट दस्‍तावेजों पर हस्‍ताक्षर करने वाले अधिकारी का दायित्‍व होगा कि वह इन्‍हें हिन्‍दी और अंग्रेजी दोनों में जारी करें।
  • यह प्रत्‍येक केन्‍द्रीय सरकार के कार्यालय के प्रशासनिक प्रमुख का दायित्‍व होगा कि वह उप नियम 2 के तहत जारी अधिनियम, नियमों और निर्देशों के प्रावधानों का उचित रूप से पालन सुनिश्चित करें तथा इस प्रयोजन के लिए उपयुक्‍त और प्रभावी जांच बिन्‍दु संकल्पित करें।

नीति
राजभाषा संकल्‍प 1968 का पालन करते हुए एक वार्षिक कार्यक्रम राजभाषा विभाग द्वारा तैयार किया जाएगा, जिसमें केन्‍द्रीय सरकार के कार्यालयों के लिए हिन्‍दी में पत्राचार, टेलीग्राम, टेलेक्‍स आदि भेजने के विषय में लक्ष्‍य तय किए जाएंगे। उपलब्धियों तथा कथित लक्ष्‍यों के बारे में केन्‍द्रीय सरकार के कार्यालयों से एक तिमाही प्रगति रिपोर्ट मंगाई जाएगी। तिमाही प्रगति रिपोर्टों के आधार पर एक वार्षिक आकलन रिपोर्ट तैयार की जाएगी, जिसे संसद के दोनों सदनों के पटल पर रखा जाएगा और इसकी प्रतियां राज्‍य सरकारों तथा केन्‍द्रीय सरकार के मंत्रालयों / विभागों को पृष्‍ठांकित की जाएंगी।

बैंगलोर, को‍चीन, मुम्‍बई, कोलकाता, गुवाहाटी, भोपाल, दिल्‍ली और गाजियाबाद में आठ क्षेत्रीय कार्यान्‍वयन कार्यालयों की स्‍थापना संघ की राजभाषा नीति के कार्यान्‍वयन की निगरानी हेतु की गई है।


समि‍तियां
राजभाषा अधिनियम, 1963 की धारा 4 के तहत 1976 में गठित राजभाषा पर एक संसदीय समिति संघ में राजभाषा के रूप में हिन्‍दी के उपयोग की आवधिक समीक्षा करने के लिए तथा इसकी रिपोर्ट राष्‍ट्रपति को सौंपने के लिए गठित की गई थी। इस समिति में लोक सभा के 20 और राज्‍य सभा के 10 सदस्‍य होते हैं। समिति ने अपनी रिपोर्ट हिस्‍सों में जमा करने का निर्णय लिया है। अब तक इस रिपोर्ट के आठ भाग राष्‍ट्रपति के पास जमा किए जा चुके हैं। इसकी रिपोर्ट के सात भागों पर राष्‍ट्रपति के आदेश जारी किए जा चुके हैं और आठवें भाग पर कार्य प्रगति पर हैं।

वर्ष 1967 में केन्‍द्रीय हिन्‍दी समिति का गठन किया गया था। इसके अध्‍यक्ष प्रधानमंत्री हैं। यह नीति निर्माता शीर्ष निकाय है, जो संघ की राजभाषा के रूप में हिन्‍दी के प्रगामी उपयोग और प्रवर्धन के लिए मार्गदर्शी सिद्धांत बनाता है।

केन्‍द्रीय हिन्‍दी समिति के निर्देशों के अधीन संबंधित मंत्रियों की अध्‍यक्षता में सभी मंत्रालयों / विभागों में हिन्‍दी सलाहकार समितियां गठित की गई हैं। ये समितियां अपने संबंधित मंत्रालयों / विभागों तथा कार्यालयों और उपक्रमों में हिन्‍दी के उपयोग की प्रगति की समीक्षा आवधिक रूप से करती हैं और हिन्‍दी के उपयोग को बढ़ावा देने के सुझाव देती हैं।

इसके अलावा केन्‍द्रीय राजभाषा कार्यान्‍वयन समिति (राजभाषा विभाग के सचिव की अध्‍यक्षता में और सभी मंत्रालयों / विभागों के राजभाषा के प्रभारी संयुक्‍त सचिवों के साथ पदेन सदस्‍यों के रूप में) द्वारा संघ के आधिकारिक प्रयोजनों के लिए हिन्‍दी के उपयोग की स्थिति की समीक्षा की जाती है, राजभाषा विभाग द्वारा समय समय पर जारी अनुदेशों का कार्यान्‍वयन किया जाता है और हिन्‍दी में इसके कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया जाता है। तथा इन अनुदेशों के कार्यान्‍वयन में देखी गई कमियों और कठिनाइयों को दूर करने के उपाय सुझाए जाते हैं।

दस या दस से अधिक केन्‍द्रीय सरकार के कार्यालयों वाले शहरों में हिन्‍दी के उपयोग की प्रगति की समीक्षा के लिए उनके सदस्‍य कार्यालयों में शहर राजभाषा कार्यान्‍वयन समिति गठित की जाती है और अनुभवों को आपस में बांटा जाता है। देश भर में अब तक 255 शहर राजभाषा कार्यान्‍वयन समितियां गठित की गई हैं।


पुरस्‍कार योजना
वर्ष 1986-87 से इंदिरा गांधी राजभाषा पुरस्‍कार योजना प्रचालनरत है। प्रत्‍येक वर्ष मंत्रालयों / विभागें, बैंकों और वित्तीय संस्‍थानों, सार्वजनिक क्षेत्र प्रतिष्‍ठानों तथा शहर राजभाषा कार्यान्‍वयन समितियों को संघ की राजभाषा नीति के कार्यान्‍वयन में असाधारण उपलब्धियों के लिए पदक दिए जाते हैं। केन्‍द्रीय सरकार, बैंकों, वित्तीय संस्‍थानों, विश्‍वविद्यालयों, प्रशिक्षण संस्‍थानों और केन्‍द्रीय सरकार के स्‍वायत्त निकायों को हिन्‍दी में मूल पुस्‍तकें लिखने वाले कार्यरत / सेवा निवृत्त कर्मचारियों को नकद पुरस्‍कार दिए जाते हैं।

ज्ञान विज्ञान पर मूल पुस्‍तक लेखन के लिए एक राष्‍ट्रीय पुरस्‍कार योजना को आधुनिक विज्ञान/ प्रौद्योगिकी तथा समकालीन विषयों की सभी शाखाओं में हिन्‍दी भाषा में पुस्‍तकें लिखने को प्रोत्‍साहन देने के लिए इसे राजीव गांधी राष्‍ट्रीय पुरस्‍कार योजना का नाम दिया गया है। यह योजना भारत के सभी नागरिकों के लिए खुली है।

क्षेत्रीय स्‍तर पर क्षेत्रीय राजभाषा पुरस्‍कार प्रति वर्ष संघ की राजभाषा नीति के कार्यान्‍वयन और हिन्‍दी के प्रगामी उपयोग को आगे बढ़ाने में असाधारण उपलब्धियों के लिए क्षेत्रीय / अधीनस्‍थ कार्यालयों, सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों, शहर राजभाषा कार्यान्‍वयन समितियों, बैंकों और केन्‍द्रीय सरकार के वित्तीय संस्‍थानों को पुरस्‍कार दिए जाते हैं।


प्रशिक्षण
राजभाषा विभाग द्वार प्रशासित हिन्‍दी शिक्षण योजना के तहत 119 पूर्ण कालिक और 49 अशंकालिक केन्‍द्रों के माध्‍यम से हिन्‍दी भाषा में प्रशिक्षण दिया जाता रहा है, जो देश भर में फैले हुए हैं। इसी प्रकार 23 पूर्णकालिक और 38 अंशकालिक केन्‍द्रों के माध्‍यम से हिन्‍दी आशुलेखन और हिन्‍दी टंकण में प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। हिन्‍दी में प्रशिक्षण देश के विभिन्‍न भागों में स्थित 229 केन्‍द्रों में प्रदान किया जा रहा है। कोलकाता, मुम्‍बई, दिल्‍ली, चेन्‍नई और गुवाहाटी के हिन्‍दी शिक्षण योजना के पांच क्षेत्रीय कार्यालय पूर्ण, पश्चिम, उत्तर - मध्‍य, दक्षिण और पूर्वोत्तर क्षेत्रों में हिन्‍दी शिक्षण योजना को शैक्षिक तथा प्रशासनिक सहायता प्रदान करते हैं। पूर्वोत्तर क्षेत्र के हिन्‍दी प्रशिक्षण की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए एक नए क्षेत्रीय मुख्‍यालय की स्‍थापना गुवाहाटी में की गई है और इम्‍फाल, एज़वाल तथा अगरतला में नए हिन्‍दी प्रशिक्षण केन्‍द्र खोले गए हैं।

केन्‍द्रीय हिन्‍दी प्रशिक्षण संस्‍थान की स्‍थापना 31 अगस्‍त, 1985 को राजभाषा विभाग के एक अधीनस्‍थ कार्यालय के रूप में हिन्‍दी भाषा / टंकण तथा आशुलेखन में संघनित पाठ्यक्रमों के माध्‍यम से हिन्‍दी प्रशिक्षण प्रदान करने के साथ ही हिन्‍दी भाषा और हिन्‍दी टंकण में पत्राचार पाठ्यक्रमों के माध्‍यम से भी प्रशिक्षण देने उद्देश्‍य के साथ की गई थी। मुम्‍बई, कोलकाता और बैंगलोर में 1988 के दौरान तथा चेन्‍नई और हैदराबाद में 1990 के दौरान इसके उप संस्‍थान खोले गए। हिन्‍दी टंकण का प्रशिक्षण कम्‍प्‍यूटर पर देने की व्‍यवस्‍था देश के लगभग सभी टंकण/ आशुलेखन केन्‍द्रों में की जा रही है।

केन्‍द्रीय अनुवाद ब्‍यूरो की स्‍थापना मार्च 1971 में विभिन्‍न मंत्रालयों / विभागों, केन्‍द्र सरकार के कार्यालयों और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों, बैंकों आदि के विभिन्‍न गैर वैधानिक साहित्‍य, हस्‍तपुस्तिकाओं / संहिताओं, प्रपत्रों आदि के विभिन्‍न प्रकारों के अनुवाद हेतु की गई थी। इस ब्‍यूरो को अनुवाद कार्य के साथ जुड़े अधिकारियों / कर्मचारियों के लिए अनुवाद प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों को आयोजित करने के दायित्‍व सौंपे गए हैं। आरंभ में नई दिल्‍ली स्थित मुख्‍यालय में 3 माह का अनुवाद प्रशिक्षण पाठ्यक्रम आयोजित किया जाता था, प्रशिक्षण सुविधाओं को सुदृढ़ बनाने और क्षेत्रीय आवश्‍यकताओं को पूरा करने के लिए मुम्‍बई, बैंगलोर और कोलकाता में अनुवाद प्रशिक्षण केन्‍द्रों की स्‍थापना की गई है। इसके अलावा केन्‍द्रीय अनुवाद ब्‍यूरो द्वारा केन्‍द्रीय सरकार के कर्मचारियों के लिए अल्‍पावधि अनुवाद पाठ्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं।


तकनीकी
यांत्रिक और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, विशेष रूप से कम्‍प्‍यूटर की सहायता से राजभाषा के उपयोग की सुविधा प्रदान करने के लिए अक्‍तूबर 1983 में राजभाषा विभाग के तहत एक तकनीकी प्रकोष्‍ठ स्‍थापित किया गया था। इस प्रकोष्‍ठ की मुख्‍य गतिविधियां इस प्रकार हैं:


  • "भाषा अनुप्रयोग साधन" का विकास - इस कार्यक्रम के तहत लीला राजभाषा, बंगला, अंग्रेजी, कन्‍नड़, मलयालम, तमिल और तेलुगु के माध्‍यम से स्‍व्‍यं सीखने के पैकेज का विकास किया गया है, मंत्रा राजभाषा अंग्रेजी से हिन्‍दी अनुवाद का एक सहायक साधन है, जिसका विकास किया गया है।
  • हिन्‍दी में कम्‍प्‍यूटर प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन - प्रतिवर्ष कम्‍प्‍यूटर पर हिन्‍दी के उपयोग के लिए प्रशिक्षण देने हेतु लगभग 100 प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है।
  • द्विभाषी अभिकलन पर प्रदर्शनियां और गोष्ठियां आयोजित करना - प्रयोक्‍ताओं तथा निर्माताओं को सहायता देने के लिए तकनीकी गोष्ठियां आयोजित की जाती हैं जहां हिन्‍दी के सॉफ्टवेयर के उपयोग पर आमने सामने चर्चा की जाती है।


प्रकाशन
राजभाषा विभाग द्वारा एक तिमाही पत्रिका "राजभाषा भारती" का प्रकाशन किया जाता है जो हिन्‍दी में राजभाषा, साहित्‍य, प्रौद्योगिकी, सूचना प्रौद्योगिकी आदि के क्षेत्र में लेखन को प्रोत्‍साहन देने एवं केन्‍द्रीय सरकार के विभिन्‍न कार्यालयों में राजभाषा हिन्‍दी के उपयोग और प्रवर्धन के लिए किए जा रहे प्रयासों को व्‍यापक प्रचार प्रदान करने हेतु समर्पित है। अब तक राजभाषा भारती के 112 अंक प्रकाशित किए गए हैं। इसी प्रकार राजभाषा नीति के कार्यान्‍वयन का एक वार्षिक कार्यक्रम हर वर्ष तैयार किया जाता है। विभिन्‍न मंत्रालयों / विभागों तथा केन्‍द्रीय सरकार / सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों आदि के कार्यालयों में राजभाषा के उपयोग के विषय में वार्षिक आकलन रिपोर्ट प्रतिवर्ष प्रकाशित की जाती है और इसे संसद के दोनों सदनों के पटल पर रखा जाता है। राजभाषा के मेनुअल, केलेण्‍डर, फिल्‍में, पोस्‍टर आदि निकाले जाते हैं जिन से राजभाषा के रूप में हिन्‍दी के प्रगामी उपयोग और प्रवर्धन से संबंधित गतिविधियों के विषय में जानकारी दी जा सके।