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स्‍मारक

सूर्य मंदिर कोणार्क

कोणार्क का सूर्य मंदिर पुरी के पवित्र शहर के पास पूर्वी ओडिशा राज्‍य में स्थित है और यह सूर्य देवता को समर्पित है। यह सूर्य देवता के रथ के आकार में बना एक भव्‍य भवन है; इसके 24 पहिए सांकेतिक डिजाइनों से सज्जित हैं और इसे छ: अश्‍वखींच रहे हैं। यह ओडिशा की मध्‍यकालीन वास्‍तुकला का अनोखा नमूना है और भारत का सबसे प्रसिद्ध ब्राह्मण तीर्थ है।

कोणार्क का मंदिर न केवल अपनी वास्‍तुकलात्‍मक भव्‍यता के लिए जाना जाता है बल्कि यह शिल्‍पकला के गुंथन और बारीकी के लिए भी प्रसिद्ध है। यह कलिंग वास्‍तुकला की उपलब्धियों का उच्‍चतम बिन्‍दु है जो भव्‍यता, उल्‍लास और जीवन के सभी पक्षों का अनोखा ताल मेल प्रदर्शित करता है।

इस मंदिर को यूनेस्‍को द्वारा विश्‍व विरासत घोषित किया गया है और इसका विमीण 1250 ए. डी. में पूर्वी गंगा राजा नरसिंह देव - 1 (ए. डी. 1238 - 64) के कार्यकाल में किया गया था। इसमें कोणार्क सूर्य मंदिर के दोनों और 12 पहियों की दो कतारें है। इनके बारे में कुछ लोगों का मत है कि 24 पहिए एक दिन में 24 घण्‍टों का प्रतीक है, जबकि अन्‍य का कहना है कि ये 12 माह का प्रतीक हैं। यहां स्थित सात अश्‍व सप्‍ताह के सात दिन दर्शाते हैं। समुद्री यात्रा करने वाले लोग एक समय इसे ब्‍लैक पगोडा कहते थे, क्‍योंकि ऐसा माना जाता है कि यह जहाज़ों को किनारे की ओर आकर्षित करता था और उनका नाश कर देता था।