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संघ


कार्यपालिका

संघीय कार्यपालिका में राष्‍ट्रपति, उप राष्‍ट्रपति और राष्‍ट्रपति को सहायता करने एवं सलाह देने के लिए अध्‍यक्ष के रूप में प्रधानमंत्री के साथ मंत्रिपरिषद शामिल हैं।

राष्‍ट्रपति
राष्‍ट्रपति का चुनाव निर्वाचिका के सदस्‍यों द्वारा किया जाता है जिसमें संसद के दोनों सदनों के चयनित सदस्‍य, समानुपातिक प्रतिनिधित्‍व प्रणाली के अनुसार राज्‍यों में विधान सभा के सदस्‍यों के द्वारा एकल अंतरणीय मत में द्वारा होता है।


उप राष्‍ट्रपति
उप राष्‍ट्रपति का चुनाव निर्वाचिका के सदस्‍यों द्वारा होता है जिसमें एकल हस्‍तांतरीय मत द्वारा समानुपातिक प्रतिनिधित्‍व प्रणाली के अनुसार संसद के दोनों सदनों के सदस्‍य होते हैं।


मंत्रिपरिषद
राष्‍ट्रपति को उनके कार्यों में सहायता करने और सलाह देने के लिए प्रधानमंत्री के नेतृत्‍व में मंत्री परिषद होती है।


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विधायिका

संघ की विधायिका को संसद कहा जाता है, यह राष्‍ट्रपति और दो सदनों, जो राज्‍य परिषद (राज्‍य सभा) और जनता का सदन (लोक सभा) कहलाते हैं, से बनती है। प्रत्‍येक सदन को इसके पिछली बैठक के बाद छह माह के अंदर बैठना होता है। कुछ मामलों में दो सदनों की संयुक्‍त बैठक की जा सकती है।

राज्‍य सभा
राज्‍य सभा के लिए अप्रत्‍यक्ष चुनाव होता है, राज्‍यों का प्रतिनिधत्वि करने वाले सदस्‍यों का चुनाव एकल हस्‍तांतरणीय मत के द्वारा समानुपातिक प्रतिनिधित्‍व प्रणाली के अनुसार राज्‍यों के विधान सभाओं के द्वारा और जब राज्‍य क्षेत्रों का प्रतिनिधित्‍व करने वालों का चुनाव संसद द्वारा कानून के तहत निर्धारित तरीके से होता है।


लोक सभा
लोक सभा जनता के प्रतिनिधियों की सभा है जिनका चुनाव वयस्‍क मतदान के आधार पर प्रत्‍यक्ष चुनाव के द्वारा होता है।


संसदीय सदस्‍यता के लिए योग्‍यता
संसद सदस्‍य के रूप में चुने जाने के लिए एक व्‍यक्ति को भारत का नागरिक होना चाहिए और राज्‍य सभा में चुने जाने के लिए उसकी आयु कम से कम 30 वर्ष और लोक सभा के मामले में कम से कम 25 वर्ष होनी चाहिए। अतिरिक्‍त योग्‍यताएं कानून द्वारा संसद निर्धारित किए जाएं।


संसद के कार्य और अधिकार
जैसा अन्‍य संसदीय लोकतंत्रों में होता है, भारत की संसद के विधायिका के कार्डिनल कार्य, प्रशासन की देखभाल, बजट पारित करना, लोक शिकायतों की सुनवाई और विभिन्‍न मुद्दों पर चर्चा करनी होती है जैसे विकास योजनाएं, राष्‍ट्रीय नीतियां, और अंतरराष्‍ट्रीय संबंध।


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संसदीय समितियां

संसद के कार्यों में विविधता तो है, साथ ही उसके पास काम की अधिकता भी रहती है। चूंकि उसके पास समय बहुत सीमित होता है, इस‍लिए उसके समक्ष प्रस्‍तुत सभी विधायी या अन्‍य मामलों पर गहन विचार नहीं हो सकता है। अत: इसका बहुत-सा कार्य समितियों द्वारा किया जाता है।

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संसद में विपक्ष के नेता

राज्‍य सभा और लोक सभा में विपक्ष के नेता की महत्‍वपूर्ण भूमिका को ध्‍यान में रखते हुए उन्‍हें वैधानिक मान्‍यता प्रदान की गई है।

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संसद में सरकारी कार्य

संसदीय कार्य मंत्री को संसद के दोनों सदनों में शासकीय कार्यों के समन्‍वय, आयोजना और व्‍यवस्‍था का दायित्‍व सौंपा गया है।

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परामर्श समितियां

संसदीय कार्य मंत्रालय में संसद के दोनों सदनों के सदस्‍यों की परामर्शी समितियां गठित की जा रही है, जिन्‍हें विभिन्‍न मंत्रालयों के साथ संलग्‍न किया जाता है और उनकी बैठकों की व्‍यवस्‍था की जाती है। मंत्रालय के मंत्रियों/राज्‍य मंत्री प्रभारियों द्वारा उस मंत्रालय की परामर्शी समिति के अध्‍यक्ष के रूप में कार्य किया जाता है।

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सरकारी समितियों/निकायों में संसद सदस्‍यों का मनोनयन

संसदीय कार्य मंत्री द्वारा संसद सदस्‍यों को विभिन्‍न मंत्रालयों में (सिवाय संवैधानिक या अन्‍य निकायों के मामले में, जहां स्थिति या उप नियम इनके अंतर्गत बनाकर संसद सदस्‍यों को इनमें नियुक्ति प्रदान करते हैं

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युवा संसद प्रतिस्‍पर्द्धा

युवा पीढी में लोकतंत्र की बुनियाद विकसित करने के लिए मंत्रालय द्वारा विद्यालयों और महाविद्यालयों/विश्‍वविद्यालयों की विभिन्‍न श्रेणियों में युवा संसद प्रतिस्‍पर्द्धा का आयोजन किया जाता है। युवा संसद योजना को सर्व प्रथम 1966-67 में दिल्‍ली के विद्यालयों में आरंभ किया गया था।

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अन्‍य संसदीय कार्य


अखिल भारतीय व्हिप सम्‍मेलन
संसदीय कार्य मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा केन्‍द्र और राज्‍यों में विभिन्‍न राजनैतिक दलों के व्हिपों के बीच उपयुक्‍त संबंध स्‍थापित करने के प्रयोजन से समय समय पर अखिल भारतीय व्हिप सम्‍मेलन का आयोजन किया जाता है

नियम 377 के तहत मामले और विशेष उल्‍लेख
संसदीय कार्य मंत्रालय द्वारा लोक सभा में प्रक्रियाविधियों के नियम और कार्य के आयोजन के नियम 377 के तहत उठाए गए मामलों पर तथा राज्‍य सभा में विशेष उल्‍लेख के माध्‍यम से अनुवर्तन कार्रवाई की जाती है। संसद के दोनों सदनों में ''प्रश्‍नकाल'' के बाद ही संसद तात्‍कालिक सार्वजनिक महत्‍व के मामले उठा सकते हैं।

आश्‍वासनों का कार्यान्‍वयन
मंत्रालय द्वारा संसद के दोनों सदनों में दैनिक कार्रवाइयों से मंत्रियों द्वारा दिए गए आश्‍वासनों, वचनों, शपथों आदि को चुना जाता है और फिर इन्‍हें कार्यान्‍वयन के लिए संबंधित मंत्रालयों /‍ विभागों में भेजा जाता है।


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प्रशासनिक ढांचा

भारत सरकार (कार्य आबंटन) नियम 1961 भारत सरकार के कार्य के आबंटन के लिए संविधान की धारा 77 के तहत राष्‍ट्रपति द्वारा बनाए गए हैं। सरकार के मंत्रालय/विभाग राष्‍ट्रपति द्वारा इन नियमों के तहत प्रधानमंत्री की सलाह पर सृजित किए जाते हैं।

मंत्रिमंडल सचिवालय

मंत्रिमंडलीय सचिवालय प्रधानमंत्री के प्रत्‍यक्ष प्रभार के तहत कार्य करता है। इस सचिवालय के प्रशासनिक प्रमुख मंत्रिमंडलीय सचिव होते हैं, जो नागरिक सेवा मंडल के पदेन अध्‍यक्ष भी होते हैं।


राष्‍ट्रीय प्राधिकरण, रासायनिक हथियार अभिसमय
राष्‍ट्रीय प्राधिकरण, रासायनिक हथियार अभिसमय (सीडब्‍ल्‍यूसी) की स्‍थापना एक सम्‍मेलन में 130 देशों द्वारा आरंभिक रूप से हस्‍ताक्षरित रासायनिक हथियार अभिसमय में बताई गई बाध्‍यताओं को पूरा करने के लिए 5 मई 1997 को मंत्रिमंडलीय सचिवालय द्वारा एक संकल्‍प द्वारा की गई थी।


सरकार के मंत्रालय/विभाग

सरकार में अनेक मंत्रालय/विभाग है। इनकी संख्‍या और प्रकार समय समय पर कारकों के अनुसार बदलते रहते हैं जैसे कि कार्य का परिमाण, विशिष्‍ट मदों के साथ जुड़े महत्‍व, अभिविन्‍यास में परिवर्तन, राजनैतिक शीघ्रता आदि। केन्‍द्र में मंत्रालयों की संख्‍या 15 अगस्‍त 1947 को 18 थी।


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लोक सेवा


अखिल भारतीय सेवाएं
स्‍वतंत्रता के पहले; भारतीय सिविल सेवा (आईसीएस) भारत में सभी सेवाओं में वरिष्‍ठतम थी। आईसीएस के आलवा भारतीय पुलिस सेवा भी थी। स्‍वतंत्रता के बाद ऐसा अनुभव किया गया कि यद्यपि आईसीएस शाही काल की बपौती थी, राष्‍ट्र की एकता, अखण्‍डता और स्थिरता को बनाए रखने के लिए अखिल भारतीय सेवाओं की आवश्‍यकता थी।


केंन्‍द्रीय सचिवालय सेवाएं
केन्द्रीय सचिवालय की तीन सेवाएं हैं, यानी (i) केंद्रीय सचिवालय सेवा (सीएसएस), (ii) केंद्रीय सचिवालय आशुलिपिक सेवा, और (सीएसएसएस) और (iii) केन्‍द्रीय सचिवालय लिपिक सेवा (सीएससीएस)। केंद्रीय सचिवालय सेवा के ग्रेड 1 और चयन ग्रेड और केंद्रीय सचिवालय आशुलिपिक सेवा के वरिष्‍ठ प्रधान निजी सचिव और प्रधान निजी सचिव के ग्रेड केंद्रीकृत हैं।


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आधिकारिक भाषा


राजभाषा - संवैधानिक/वैधानिक प्रावधान
संविधान की धारा 343(1) के अनुसार देवनागरी लिपि में हिन्‍दी संघ की राजभाषा होगी। धारा 343(2) में अंग्रेजी को आधिकारिक कार्य में उपयोग संविधान आंरभ होने की तिथि के 15 वर्ष (अर्थात 25 जनवरी 1965) की अवधि तक जारी रखने के लिए कहा गया है।


नीति
राजभाषा संकल्‍प 1968 का पालन करते हुए एक वार्षिक कार्यक्रम राजभाषा विभाग द्वारा तैयार किया जाएगा, जिसमें केन्‍द्रीय सरकार के कार्यालयों के लिए हिन्‍दी में पत्राचार, टेलीग्राम, टेलेक्‍स आदि भेजने के विषय में लक्ष्‍य तय किए जाएंगे। उपलब्धियों तथा कथित लक्ष्‍यों के बारे में केन्‍द्रीय सरकार के कार्यालयों से एक तिमाही प्रगति रिपोर्ट मंगाई जाएगी।


समि‍तियां
राजभाषा अधिनियम, 1963 की धारा 4 के तहत 1976 में गठित राजभाषा पर एक संसदीय समिति संघ में राजभाषा के रूप में हिन्‍दी के उपयोग की आवधिक समीक्षा करने के लिए तथा इसकी रिपोर्ट राष्‍ट्रपति को सौंपने के लिए गठित की गई थी। इस समिति में लोक सभा के 20 और राज्‍य सभा के 10 सदस्‍य होते हैं।


पुरस्‍कार योजना
वर्ष 1986-87 से इंदिरा गांधी राजभाषा पुरस्‍कार योजना प्रचालनरत है। प्रत्‍येक वर्ष मंत्रालयों / विभागें, बैंकों और वित्तीय संस्‍थानों, सार्वजनिक क्षेत्र प्रतिष्‍ठानों तथा शहर राजभाषा कार्यान्‍वयन समितियों को संघ की राजभाषा नीति के कार्यान्‍वयन में असाधारण उपलब्धियों के लिए पदक दिए जाते हैं।


प्रशिक्षण
राजभाषा विभाग द्वार प्रशासित हिन्‍दी शिक्षण योजना के तहत 119 पूर्ण कालिक और 49 अशंकालिक केन्‍द्रों के माध्‍यम से हिन्‍दी भाषा में प्रशिक्षण दिया जाता रहा है, जो देश भर में फैले हुए हैं। इसी प्रकार 23 पूर्णकालिक और 38 अंशकालिक केन्‍द्रों के माध्‍यम से हिन्‍दी आशुलेखन और हिन्‍दी टंकण में प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है।


तकनीकी
यांत्रिक और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, विशेष रूप से कम्‍प्‍यूटर की सहायता से राजभाषा के उपयोग की सुविधा प्रदान करने के लिए अक्‍तूबर 1983 में राजभाषा विभाग के तहत एक तकनीकी प्रकोष्‍ठ स्‍थापित किया गया था। इस प्रकोष्‍ठ की मुख्‍य गतिविधियां इस प्रकार हैं:


प्रकाशन
राजभाषा विभाग द्वारा एक तिमाही पत्रिका ''राजभाषा भारती'' का प्रकाशन किया जाता है जो हिन्‍दी में राजभाषा, साहित्‍य, प्रौद्योगिकी, सूचना प्रौद्योगिकी आदि के क्षेत्र में लेखन को प्रोत्‍साहन देने एवं केन्‍द्रीय सरकार के विभिन्‍न कार्यालयों में राजभाषा हिन्‍दी के उपयोग और प्रवर्धन के लिए किए जा रहे प्रयासों को व्‍यापक प्रचार प्रदान करने हेतु समर्पित है। अब तक राजभाषा भारती के 112 अंक प्रकाशित किए गए हैं।


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नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक

नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की नियुक्ति राष्‍ट्रपति द्वारा होती है। उसको पद से हटाने की प्रक्रिया और कारण सर्वोच्‍च न्‍यायालय के संबंध में लागू प्रक्रिया के समान ही है। जब वह अपने पद में नहीं रहता तो वह केंद्र या राज्‍य सरकार के अधीन और कोई पद धारण करने का पात्र नहीं होता है।

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प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायतें

कार्मिक लोक शिकायतें और पेंशन मंत्रालय में प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग, प्रशा‍सनिक सुधारों तथा विशेष रूप से केंद्रीय सरकार के संगठनों एवं सामान्‍य तौर पर राज्‍य तथा संघ राज्‍य क्षेत्र के प्रशासन से संबंधित लोक शिकायतों के समाधान के लिए सरकार की नोडल एजेंसी है।

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प्रशासनिक न्‍यायाधिकरण

प्रशासनिक न्‍यायाधिकरण अधिनियम के 1985 में अधिनियमन ने व्‍यथित सरकारी कर्मचारियों को न्‍याय देने के क्षेत्र में एक नया अध्‍याय प्रारम्‍भ किया। प्रशासनिक न्‍यायाधिकरण का उद्गव संविधान के अनुच्‍छेद 323-ए से हुआ है,जिसके अंतर्गत केंद्र सरकार को, केंद्र और राज्‍यों के कार्य संचालन के संबंध में लोक सेवा और पदों पर नियुक्‍त व्‍यक्तियों की भर्ती और सेवा शर्तों के संबंध में विवादों और शिकायतों के निपटारे हेतु संसद द्वारा पारित अधिनियम के अंतर्गत प्रशासनिक न्‍यायाधिकरण स्‍थापित करने की शक्ति प्राप्‍त है।

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