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जनगणना

जनगणना 2011 देश के इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। यह ऐसे समय में निष्पादित की जा रही है, जब भारत का नाम दुनिया और आधुनिक राष्ट्र के रूप में सशक्त होकर उभर रहा है। हमारे देश का मानव संसाधन दुनिया में अद्वितीय माना जाता है तथा हमारी अर्थव्यवस्था एवं संस्कृति इसे भविष्य का उन्नत देश बनाने में महत्वपूर्ण रोल निभा रही हैं।

जनगणना 2011 को दो चरणों में पूरा किया गया है। पहले चरण में अप्रैल से सितम्बर 2010 के बीच देशभर में घरों की गिनती कई है। दूसरे चरण की शुरुआत 9 फरवरी 2011 को हुई जो 28 फरवरी, 2011 तक चली।

राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) की रचना जनगणना 2011 के लिए मील का पत्थर है। यह देश के निवासियों के लिए एक व्यापक पहचान डाटाबेस का निर्माण करेगा। इसे बॉयोमीट्रिक डाटा की तरह सुरक्षित रखकर उपयोग किया जाएगा, जिसमें प्रत्येक व्यक्ति (15 वर्ष एवं उससे अधिक आयु वर्ग के लोग) की अद्वितीय पहचान संख्या (यूआईडी) दर्ज रहेगी।

महापंजीयक और जनगणना आयुक्त, भारत सरकार के कार्यालय द्वारा देश के सभी सामान्य निवासियों को चरणबद्ध तरीके से राष्ट्रीय पहचान पत्र वितरित किया जाएगा।