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राष्‍ट्र-गान

भारत का राष्‍ट्र गान अनेक अवसरों पर बजाया या गाया जाता है। राष्‍ट्र गान के सही संस्‍करण के बारे में समय समय पर अनुदेश जारी किए गए हैं, इनमें वे अवसर जिन पर इसे बजाया या गाया जाना चाहिए और इन अवसरों पर उचित गौरव का पालन करने के लिए राष्‍ट्र गान को सम्‍मान देने की आवश्‍यकता के बारे में बताया जाता है। सामान्‍य सूचना और मार्गदर्शन के लिए इस सूचना पत्र में इन अनुदेशों का सारांश निहित किया गया है।


राष्‍ट्र गान - पूर्ण और संक्षिप्‍त संस्‍करण

स्‍वर्गीय कवि रविन्‍द्र नाथ टैगोर द्वारा "जन गण मन" के नाम से प्रख्‍यात शब्‍दों और संगीत की रचना भारत का राष्‍ट्र गान है। इसे इस प्रकार पढ़ा जाए:

उपरोक्‍त राष्‍ट्र गान का पूर्ण संस्‍करण है और इसकी कुल अवधि लगभग 52 सेकंड है।
जन-गण-मन अधिनायक जय हे
भारत भाग्‍य विधाता ।
पंजाब-सिंधु-गुजरात-मराठा
द्राविड़-उत्‍कल-बंग
विंध्य हिमाचल यमुना गंगा
उच्‍छल जलधि तरंग
तव शुभ नामे जागे, तव शुभ आशिष मांगे
गाहे तव जय-गाथा ।
जन-गण-मंगलदायक जय हे भारत भाग्‍य विधाता ।
जय हे, जय हे, जय हे, जय जय जय जय हे ।

राष्‍ट्र गान की पहली और अंतिम पंक्तियों के साथ एक संक्षिप्‍त संस्‍करण भी कुछ विशिष्‍ट अवसरों पर बजाया जाता है। इसे इस प्रकार पढ़ा जाता है:

संक्षिप्‍त संस्‍करण को चलाने की अवधि लगभग 20 सेकंड है।
जन-गण-मन अधिनायक जय हे
भारत-भाग्‍य-विधाता ।
जय हे, जय हे, जय हे, जय जय जय जय हे ।

निम्नलिखित गान का टैगोर की अंग्रेजी प्रतिपादन है:

जन गण मन अधिनायक जय हे भारत,
भारत की नियति की मशीन।
तेरा नाम, पंजाब, सिंध के दिलों किससे
गुजरात और मराठा,
द्रविड़ और ओडिशा और बंगाल की;
यह विंध्य और हिमालय की पहाड़ियों में गूँज,
यमुना और गंगा के संगीत में मिल जाता है और
भारतीय समुद्र की लहरों से बोले।
वे तेरा आशीर्वाद के लिए प्रार्थना करते हैं और तेरी प्रशंसा गाते हैं।
सभी लोगों की बचत तेरे हाथ में इंतजार कर रहा है,
भारत की नियति का तू निकालने की मशीन।
विजय, विजय, तुमको करने के लिए जीत है।
ध्यान दें*

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