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मेरा भारत मेरी शान

भारत दुनियां की सबसे पुरानी सभ्‍यताओं में से एक हैं, जो 4,000 से अधिक वर्षों से चली आ रही है और जिसने अनेक रीति-रिवाजों और परम्‍पराओं का संगम देखा है। यह देश की समृद्ध संस्‍कृति और विरासत का परिचायक है।

राष्‍ट्र के इतिहास में उपनिवेशवाद से उबरते एक देश से लेकर 50 वर्षों के अंदर वैश्चिक परिदृश्‍य में एक अग्रणी अर्थव्‍यवस्‍था तक के विकास में उदारता की झलकें दिखाई देती है। लोगों में इन सबसे बढकर राष्‍ट्रीयता की भावना इस विकास के योगदान में सक्रिय रही है। राष्‍ट्र का यह विकसित होता रूप देश और दुनियां में प्रत्‍येक भारतीय के मन में राष्‍ट्रीय गर्व की भावना उत्‍पन्‍न करता है और यह खण्‍ड इसी भावना को सदैव आगे बढाने का एक विनम्र प्रयास है।

पुरस्‍कार के बारे में जानें

 

राष्ट्र के विषय में तथ्य

भारतीय राष्‍ट्रीय झण्‍डे की आचार संहिता, जिसे भारतीय झण्‍डे की संहिता, 2002 कहा गया है, कानूनों, प्रथाओं, परम्‍पराओं और अनुदेशों को एक साथ लाकर प्रत्‍येक संबंधित व्‍यक्ति को इसके लिए मार्गदर्शन देने और लाभ पहुंचाने का एक प्रयास है। भारतीय झण्‍डे की संहिता 2002 के बारे और अधिक जानें। भारत का राष्‍ट्रीय झण्‍डा (gif - 2 केबी) डाउनलोड करें।

गीत जन - गण-मन, रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा बंगाली में मूल रूप से बना , 24 जनवरी 1950 को भारत के राष्ट्रीय गान के रूप में संविधान सभा द्वारा इसके हिंदी संस्करण में अपनाया गया था।


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भारत पर उद्धरण

  • विश्‍व भर के इतिहासकारों, लेखकों, राजनेताओं और अन्‍य जानी मानी हस्तियों ने भारत की प्रशंसा की है और शेष विश्‍व को दिए गए योगदान की सराहना की है। जबकि ये टिप्‍पणियां भारत की महानता का केवल कुछ हिस्‍सा प्रदर्शित करती हैं, फिर भी इनसे हमें अपनी मातृभूमि पर गर्व का अनुभव होता है।

    "हम सभी भारतीयों का अभिवादन करते हैं, जिन्‍होंने हमें गिनती करना सिखाया, जिसके बिना विज्ञान
    की कोई भी खोज संभव नहीं थी।!"

    एल्बर्ट आइनस्‍टाइन(सैद्धांतिक भौतिक विज्ञानी, जर्मनी)

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  • "भारत मानव जाति का पालना है, मानवीय वाणी का जन्‍म स्‍थान है, इतिहास की जननी है और विभूतियों की दादी है और इन सब के ऊपर परम्‍पराओं की परदादी है।

    इतिहास में हमारी सबसे कीमती और सबसे अधिक अनुदेशात्‍मक सामग्री
    का भण्‍डार केवल भारत में है!"

    मार्क ट्वेन(लेखक, अमेरिका)

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  • "दुनिया के कुछ हिस्‍से ऐसे हैं जहां एक बार जाने के बाद वे आपके मन में बस जाते हैं और उनकी याद कभी नहीं मिटती। मेरे लिए भारत एक ऐसा ही स्‍थान है। जब मैंने यहां पहली बार कदम रखा तो मैं यहां की भूमि की समृद्धि, यहां की चटक हरियाली और भव्‍य वास्‍तुकला से, यहां के रंगों, खुशबुओं, स्‍वादों और ध्‍वनियों की शुद्ध, संघन तीव्रता से अपने अनुभूतियों को भर लेने की क्षमता से अभिभूत हो गई।

    यह अनुभव कुछ ऐसा ही था जब मैंने दुनिया को उसके स्‍याह और सफेद रंग में देखा,
    जब मैंने भारत के जनजीवन को देखा और पाया कि यहां सभी कुछ चमकदार बहुरंगी है।"

    किथ बेलोज़ं(मुख्‍य संपादक, नेशनल जियोग्राफिक सोसाइटी)

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  • "भारत ने शताब्दियों से एक लम्‍बे आरोहण के दौरान मानव जाति के एक चौथाई भाग पर अमिट छाप छोड़ी है। भारत के पास उसका स्‍थान मानवीयता की भावना को सांकेतिक रूप से दर्शाने और महान राष्‍ट्रों के बीच अपना स्‍थान बनाने का दावा करने का अधिकार है।

    पर्शिया से चीनी समुद्र तक साइबेरिया के बर्फीलें क्षेत्रों से जावा और बोरनियो के द्वीप समूहों तक भारत में अपनी मान्‍यता,
    अपनी कहानियां और अपनी सभ्‍यता का प्रचार प्रसार किया है।"

    सिल्विया लेवी(फ्रांसीसी विद्वान)

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