Menu

साहित्‍य, कला और हस्‍तशिल्‍प

साहित्‍य

भारतीय साहित्‍य की परम्‍परा विश्‍व में सबसे प्राचीन है। प्रारम्‍भ में यह काव्‍य रूप में था जिसे गाकर सुनाया जाता था। साहित्‍य की प्रारम्भिक कृतियां गीत अथवा छन्‍द के रूप में होती थी। यह सिलसिला कई पी‍ढ़ियों तक चलता रहा और फिर साहित्‍य का यह लिपिबद्ध रूप सामने आया।


संस्‍कृत साहित्‍य

भारत में सरकारी तौर पर 22 भाषाओं को मान्‍यता दी गई है और पिछले कुछ समय में इन भाषाओं में एक विशाल साहित्‍य का संकलन हुआ है। अधिकांश भारतीय संस्‍कृति पर हिन्‍दू साहित्‍य परम्‍परा का प्रभाव है। वेदों के अलावा, जो कि एक धार्मिक ग्रंथ है, हिन्‍दू साहित्‍य की कई अन्‍य कृतियाँ हैं जैसे कि हिन्‍दू महाकाव्‍य रामायण और महाभारत, भवन-निर्माण और नगर आयोजना में वास्‍तुशिल्‍प त‍था राजनीतिविज्ञान में अर्थशास्‍त्र जैसे शोध ग्रंथ। संस्‍कृत की सर्वाधिक प्रसिद्ध हिन्‍दू कृतियां वेद, उपनिषद और मनुस्‍मृति हैं। दूसरा लोकप्रिय साहित्‍य है तमिल साहित्‍य, जिसकी 2000 वर्ष पुरानी साहित्‍य परम्‍परा बहुत ही समृद्ध है। यह साहित्‍य महाकाव्‍यों के रूप में अपने काव्‍यात्‍मक स्‍वरूप और दार्शनिक तथा लौकिक रचनाओं के लिए विशेष तौर पर जाना जाता है।

अन्‍य महान साहित्यिक रचनाएं जिनसे भारतीय साहित्‍य के स्‍वर्ण युग का निर्माण हुआ, कालीदास की 'अभिज्ञान शकुन्‍तलम' और 'मेघदूत', शुद्रक की 'मृच्‍छकटिकम' भास की 'स्‍वप्‍न वासवदत्ता' और श्री हर्ष की द्वारा रचित 'रत्‍नावली' है। अन्‍य प्रसिद्ध कृतियां चाणक्‍य द्वारा रचित अर्थशास्‍त्र और वात्‍स्‍यायन का 'कामसूत्र' है।

उत्तरी भारत के कृष्‍ण और राम के अनुयायियों द्वारा स्‍थानीय बोलियों में रचित साहित्‍य भारतीय साहित्‍य की अति प्रसिद्ध कृतियां है। इसमें बारहवीं शताब्‍दी के दौरान रचित जयदेव की कविताएं जो 'गीत गोविन्‍द' के नाम से प्रसिद्ध है और मैथिली (बिहार की पूर्वी हिन्‍दी) में लिखी गई आध्‍यात्मिक प्रेम की कविताएं भी शामिल हैं। भक्ति के रूप (ईश्‍वर के प्रति व्‍यक्ति की श्रृद्धा), जिसमें राम (विष्‍णु के अवतार) को सम्‍बोधित किया गया है, साहित्‍य का निर्माण हुआ है। इसमें सबसे उल्‍लेखनीय कृति कवि तुलसीदास की अवधि में लिखित 'रामचरितमानस' है। सिक्‍ख धर्म के आर्य गुरूओं अथवा संस्‍थापकों विशेष रूप से गुरू नानक और गुरू अर्जुन देव ने भी ईश्‍वर का गुणगान करते हुए भजनों की रचना की है। सोलहवीं शताब्‍दी में राजस्‍थान की राजकुमारी और कवियत्री मीरा बाई ने कृष्‍ण का गुणगान करते हुए भक्ति गीतों की रचना की है और गुजराती कवि नरसिंह मेहता की गीत रचना भी इसी प्रकार है।

हिन्‍दी साहित्‍य

हिन्‍दी साहित्‍य का प्रारम्‍भ मध्‍यकाल में अवधी और ब्रज भाषाओं में धार्मिक और दार्शनिक काव्‍य रचनाओं से हुआ। इस काल के प्रसिद्ध कवियों में कबीर और तुलसीदास विख्‍यात हैं। आधुनिक युग में खड़ी बोली ज्‍यादा लोकप्रिय हो गई और संस्‍कृत में नानाविध साहित्‍य की रचना हुई।

देवकीनन्‍दन खत्री द्वारा लिखित चन्‍द्रकान्‍ता को हिन्‍दी गद्य की प्रथम कृति माना गया है। मुंशी प्रेमचन्‍द हिन्‍दी के प्रसिद्ध उपन्‍यासकार थे। मैथिलीशरण गप्‍त, जयशंकर प्रसाद, सुमित्रानन्‍दन पंत, महादेवी वर्मा और रामधारी सिंह दिनकर इस काल के अन्‍य प्रसिद्ध कवि थे।

ब्रिटिश युग में पश्‍चि‍मी विचारधारा के प्रभाव और मुद्रणालय के आरम्‍भ होने से साहित्‍य के क्षेत्र में एक क्रान्ति आई। स्‍वतंत्रता संग्राम के आंदोलन को बल देने और समाज में मौजूद बुराइयों को दूर करने के उद्देश्‍य से रचनाएं तैयार की गई। भारत में विज्ञान की शिक्षा प्रारम्‍भ करने के राम मोहन राय के अभियान और स्‍वामी विवेकानन्‍द की कृतियों को भारत में अंग्रेजी साहित्‍य का बहुत बड़ा उदाहरण माना गया।

विगत 150 वर्षों के दौरान, आधुनिक भारतीय साहित्‍य के विकास में बहुत से लेखकों का योगदान रहा है, कई क्षेत्रीय भाषाओं और अंग्रेजी में रचनाएं की। एक महान बंगाली लेखक श्री रवीन्‍द्र नाथ टैगोर पहले भारतीय थे जिन्‍हें वर्ष 1913 में साहित्‍य (गीतांजली) के लिए नोबेल पुरसकर प्रदान किया गया था।

अंग्रेजी साहित्‍य

भारत के आधुनिक काल में अन्‍य कई लेखकों को भी प्रसिद्धि मिली जैसे कि मुल्‍क राज आनन्‍द जिनकी प्रसिद्ध कृतियां थी 'अनटचेबल' (1935) और 'कुली' (1936), आर. के. नारायण जिन्‍होंने उपन्‍यास लिखे और दक्षिण भारत के गांव की कहानी लिखी जैसे कि 'स्‍वामी एण्‍ड फ्रेंड्स। युवा लेखकों में अनीता देसाई का नाम लिया जाता है जिन्‍होंने 'क्‍लीयर लाइट ऑफ दि डे' (1980) और 'इन कस्‍टडी' प्रसिद्ध उपन्‍यासों की रचना की।

अन्‍य सुविख्‍यात उपन्‍यासकारों/लेखकों के नाम इस प्रकार है: डॉम मोरेस, एन लिसिम ई जेघियल, पी. लाल, ए.के. रामानुजन, कमला दास, अरूण कोलटकर और आर. पार्थसारथी, राजा राव, जी.वी. देसाई, देसानी, एम. अनन्‍तनारायण, भदानी भट्टाचार्य, मनोहर मालगांवकर, नयनतारा सहगल, ओ. वी. विजयन, सलमान रशदी, श्री निसासन आयंगर, सीडी नरसिंहमन और एम.के. नायक।

इसके बाद के लेखकों में विक्रम सेठ ('ए सूटेबल बॉय'), एलन सियली ('दि ट्रॉटर-नामा'), शशी थरूर ('शो बिजनस'), आमित्‍व घोष ('सर्थिस ऑफ रीज़न', 'शेडो लाइन्‍स'), उपमन्‍यु चटर्जी ('इंगलिश अगस्‍त') और विक्रम चन्‍द्र ('रेड अर्थ और पोरिंग रेन') का नाम आता है।

पिछले कुछ समय में महिला लेखकों जैसे कि अरुंधती राय जिन्‍हें ' गॉड ऑफ स्‍माल थिंग्‍स', के लिए बुकर प्राइज दिया गया है, झुम्‍पा लहरी जिन्‍हें कथा साहित्‍य के लिए वर्ष 2000 का पोल्टिजर पुरस्‍कार प्रदान किया गया है, शोभा डे, आदि के लोकप्रिय लेखों के साथ एक पूर्णतया नई शैली का प्रारम्‍भ हुआ है।